• Sahaj Aasiki Nahin

Sahaj Aasiki Nahin - सहज आसिकी नाहिं

प्रेम ही जीवन है, प्रेम ही मंदिर है, प्रेम ही पूजा है, इस सत्य का उदघाटन ओशो ने संत पलटू के वचनों पर बोलते हुए किया है। प्रेम के स्वरूप को समझाते हुए ओशो कहते हैं : ‘‘मैं तो चाहूंगा कि अब प्रेम के मंदिर हों। प्रेम की एक खूबी है कि प्रेम न तो हिंदू होता न मुसलमान होता, न ईसाई होता न जैन होता; न हिंदुस्तानी, न पाकिस्तानी, न अफगानिस्तानी। प्रेम तो बस प्रेम है। प्रेम तो बहुत विराट है, सभी को आत्मसात कर लेता है।’’

 

विषय सूची

प्रवचन 1 : यह प्रेम का मयखाना है

प्रवचन 2 : सहज निर्मलता

प्रवचन 3 : आत्म-श्रद्धा की कीमिया

प्रवचन 4 : संन्यास यानी नया जन्म

प्रवचन 5 : अब प्रेम के मंदिर हों

प्रवचन 6 : है इसका कोई उत्तर

प्रवचन 7 : मैं तुम्हारा कल्याण-मित्र हूं

प्रवचन 8 : स्वाध्याय ही ध्यान है

प्रवचन 9 : जिसको पीना हो आ जाए

प्रवचन 10 : अंतर-आकाश के फूल

 

 

 

Sahaj Aasiki Nahin

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