• Mrityorma Amritam Gamay

Mrityorma Amritam Gamay - मृत्‍योर्मा अमृतं गमय

इस पुस्तक की भूमिका में सुप्रसिद्ध लेखक श्री वेदप्रताप वैदिक कहते हैं : यह पुस्तक अन्य पुस्तकों जैसी पुस्तक नहीं है। यह लिखी नहीं गई। यह बोली गई है लेकिन तैयार नहीं की गई। यह तैयार किए गए प्रवचनों का संग्रह भी नहीं है। वास्तव में ये प्रवचन भी नहीं हैं। ये तो प्रश्नोत्तर हैं। संभाषण है—सदगुरु और शिष्यों के बीच। अचानक प्रश्न और अचानक उत्तर। जैसे सुबह-सुबह आंख खुले और ओस के मोती बिखरे मिलें, जैसे कोई कली अचानक चटके और फूल बन जाए, जैसे चंदन पके और अचानक उसमें सुगंध उग आए, जैसे हिमालय की घाटियों में आप अचानक कहीं से पत्थर हटाएं और कोई सोता फूट निकले। कहीं कोई प्रयत्न नहीं। सब सहज, सरल, स्वाभाविक।
‘यह ओशो की वाग्वीथि है। इसमें नए मनुष्य के निर्माण का सपना गूंज रहा है। इसीलिए बीसवीं सदी की दुनिया में ओशो जैसा कोई दूसरा उपदेष्टा नहीं हुआ। ‘‘मृत्योर्मा अमृतं गमय’’ इस सत्य की एक बानगी है।’

 

विषय सूची

प्रवचन 1 : धर्म की आड़ में अहंकार

प्रवचन 2 : ध्यान, प्रेम और संन्यास

प्रवचन 3 : प्रेम की आग

प्रवचन 4 : धर्म है प्रेम की पराकाष्ठा

प्रवचन 5 : संन्यास का आमंत्रण

प्रवचन 6 : अहोभाव, धन्यवाद—पश्चाताप नहीं

प्रवचन 7 : अभीप्सा का जन्म

प्रवचन 8 : बुद्धत्व की धन्यता

प्रवचन 9 : नए मनुष्य का आगमन

प्रवचन 10 : सदगुरु की पुकार

 

 

Mrityorma Amritam Gamay

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