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Krishna Smriti - कृष्‍ण-स्‍मृति

सोलह कला संपूर्ण व्यक्तित्व वाले कृष्ण कोई व्यक्ति नहीं, एक संपूर्ण जीवन-दृ‍ष्टि के रूप में हमारे जीवन के कैनवस पर अपने रंग बिखेरते चलते हैं। भारतीय जन-मानस पर कृष्ण की इतनी गहरी छाप ने ओशो को समझने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। 
कृष्ण ने जीवन को उसके सभी आयामों में अंगीकार किया है। संस्कारों में बंधे व्यक्ति के लिए यह इतना आसान नहीं परंतु भले ही अवतार की छवि ‍के रूप में, लेकिन कहीं तो उसका अंतरतम उसे सब स्वीकारने को आंदोलित करता है। उसी साहस को जुटाने के लिए शायद ओशो जैसे रहस्यदर्शी द्वारा इस पुस्तक में की गयी चर्चा सहायक होगी।


प्रवचन 1 : हंसते व जीवंत धर्म ‍के प्रतीक कृष्ण विषय सूची

प्रवचन 2 : इहलौकिक जीवन के समग्र स्वीकार के प्रतीक कृष्ण 
प्रवचन 3 : अनुपार्जित सहज शून्यता के प्रतीक कृष्ण 
प्रवचन 4 : स्वधर्म-निष्ठा ‍के आत्यंतिक प्रतीक कृष्ण 
प्रवचन 5 : ‘अकारण’ के आत्यंतिक प्रतीक कृष्ण 
प्रवचन 6 : जीवन के बृहद् जोड़ के प्रतीक कृष्ण 
प्रवचन 7 : जीवन में महोत्सव के प्रतीक कृष्ण 
प्रवचन 8 : क्षण-क्षण जीने के महाप्रतीक कृष्ण 
प्रवचन 9 : विराट जागतिक रासलीला ‍के प्रतीक कृष्ण 
प्रवचन 10 : स्वस्थ राजनीति के प्रतीकपुरुष कृष्ण 
प्रवचन 11 : मानवीय पहलूयु‍क्त भगवत्ता ‍के प्रतीक कृष्ण 
प्रवचन 12 : साधनारहित सिद्धि ‍के परमप्रतीक कृष्ण 
प्रवचन 13 : अचिंत्य-धारा ‍के प्रतीकबिंदु कृष्ण 
प्रवचन 14 : अकर्म के पूर्ण प्रतीक कृष्ण 
प्रवचन 15 : अनंत सागररूप चेतना ‍के प्रतीक कृष्ण 
प्रवचन 16 : सीखने की सहजता के प्रतीक कृष्ण 
प्रवचन 17 : स्वभाव की पूर्ण खिलावट के प्रतीक कृष्ण 
प्रवचन 18 : अभिनयपूर्ण जीवन के प्रतीक कृष्ण 
प्रवचन 19 : फलाकांक्षामुक्त कर्म के प्रतीक कृष्ण 
प्रवचन 20 : राजपथरूप भव्य जीवनधारा के प्रतीक कृष्ण 
प्रवचन 21 : वंशीरूप जीवन के प्रतीक कृष्ण 

 

 

 

 

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