• Geeta Darshan-Vol.6

Geeta Darshan-Vol.6 - गीता-दर्शन भाग छह

प्रेम एक गहरी श्वास है। और प्रेम के बिना भीतर का जो गहन छिपा हुआ प्राण है, वह जीवित नहीं होता। इसकी भूख है। इसलिए प्रेम के बिना आप असुविधा अनुभव करेंगे। यह पे्रम की भूख अध्यात्म बन सकती है। अगर यह प्रेम की भूख मूल की तरफ लौटा दी जाए; अगर यह प्रेम की भूख पदार्थ की तरफ से परमात्मा की तरफ लौटा दी जाए; अगर यह प्रेम की भूख परिवर्तनशील जगत से शाश्वत की तरफ लौटा दी जाए, तो यह भक्ति बन जाती है। ओशो 

इस पुस्तक में गीता के बारहवें व तेरहवें अध्याय--भक्ति-योग और क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ-विभाग-योग--तथा विविध प्रश्नों व विषयों पर चर्चा है। 
कुछ विषय-बिंदु: 

*आधुनिक मनुष्य की साधना

*दुख से मुक्ति का मार्ग 

*प्रेम के मार्ग पर कौन सी बाधाएं

*मनोवेगों का विसर्जन आवश्यक क्यों?

*मनुष्य की बेचैनी का कारण क्या है?

विषय सूची

अध्याय-12 
प्रवचन 1: प्रेम का द्वार:भक्ति में प्रवेश 
प्रवचन 2: दो मार्ग: साकार और निराकार 
प्रवचन 3: पाप और प्रार्थना 
प्रवचन 4: संदेह की आग 
प्रवचन 5: अहंकार घाव है 
प्रवचन 6: कर्म-योग की कसौटी 
प्रवचन 7: परमात्मा का प्रिय कौन 
प्रवचन 8: उद्वेगरहित अहंशून्य भक्त 
प्रवचन 9: भक्ति और स्त्रैण गुण 
प्रवचन 10: सामूहिक शक्तिपात ध्यान 
प्रवचन 11: आधुनिक मनुष्य की साधना 

अध्याय-13 
प्रवचन 1: दुख से मुक्ति का मार्ग: तादात्म्य का विसर्जन 
प्रवचन 2: क्षेत्रज्ञ अर्थात निर्विषय, निर्विकार चैतन्य 
प्रवचन 3: रामकृष्ण की दिव्य बेहोशी 
प्रवचन 4: समत्व और एकीभाव 
प्रवचन 5: समस्त विपरीतताओं का विलय-परमात्मा में 
प्रवचन 6: स्वयं को बदलो 
प्रवचन 7: पुरुष-प्रकृति-लीला 
प्रवचन 8: गीता में समस्त मार्ग हैं 
प्रवचन 9: पुरुष में थिरता के चार मार्ग 
प्रवचन 10: कौन है आंख वाला 
प्रवचन 11: साधना और समझ 
प्रवचन 12: अकस्मात विस्फोट की पूर्व-तैयारी 

 

 

 

Geeta Darshan-Vol.6

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