• Geeta Darshan-Vol.5

Geeta Darshan-Vol.5 - गीता-दर्शन भाग पांच

अर्जुन को पता हो या न पता हो, ये कृष्ण के वचन जन्मों-जन्मों तक भी वह सुनता रहे, तो भी इनको सुनकर ही संतोष नहीं मिलेगा। इनके अनुकूल रूपांतरित होना पड़ेगा, इनके अनुकूल अर्जुन को बदलना पड़ेगा। और अगर इनके अनुकूल अर्जुन बदल जाए, तो अर्जुन स्वयं कृष्ण हो जाएगा। कृष्ण हो जाए, तो ही संतुष्ट हो सकेगा। उसके पहले कोई संतोष नहीं है। उसके पहले अतृप्ति बढ़ती चली जाएगी। अगर कोई वचनों से ही तृप्त होना चाहे, तो कभी तृप्त न हो सकेगा। चलना पड़ेगा उस ओर, जिस ओर ये वचन इशारा करते हैं, इंगित करते हैं। जहां ये ले जाना चाहते हैं, वहां कोई पहुंचे तो तृप्ति होगी। ओशो 

इस पुस्तक में गीता के दसवें व ग्यारहवें अध्याय--विभूति-योग व विश्वरूप-दर्शन-योग--तथा विविध प्रश्नों व विषयों पर चर्चा है। 
कुछ विषय-बिंदु: 

*निश्चल ध्यानयोग क्या है?

*कृष्ण द्वारा विभूतियां कहने का रहस्य

*काम-ऊर्जा का ऊर्ध्वगमन कैसे हो

*साधना के चार चरण

विषय सूची

अध्याय-10 
प्रवचन 1: अज्ञेय जीवन-रहस्य 
प्रवचन 2: रूपांतरण का आधार-निष्कंप चित्त और जागरूकता 
प्रवचन 3: ईश्वर अर्थात ऐश्वर्य 
प्रवचन 4: ध्यान की छाया है समर्पण 
प्रवचन 5: कृष्ण की भगवत्ता और डांवाडोल अर्जुन 
प्रवचन 6: स्वभाव की पहचान 
प्रवचन 7: शास्त्र इशारे हैं 
प्रवचन 8: सगुण प्रतीक-सृजनात्मकता, प्रकाश, संगीत और बोध के 
प्रवचन 9: मृत्यु भी मैं हूं 
प्रवचन 10: अभिजात्य का फूल 
प्रवचन 11: काम का राम में रूपांतरण 
प्रवचन 12: शस्त्रधारियों में राम 
प्रवचन 13: मैं शाश्वत समय हूं 
प्रवचन 14: परम गोपनीय-मौन 
प्रवचन 15: मंजिल है स्वयं में 

अध्याय-11
प्रवचन 1: विराट से साक्षात की तैयारी 
प्रवचन 2: दिव्य-चक्षु की पूर्व-भूमिका 
प्रवचन 3: धर्म है आश्चर्य की खोज 
प्रवचन 4: परमात्मा का भयावह रूप 
प्रवचन 5: अचुनाव अतिक्रमण है 
प्रवचन 6: पूरब और पश्चिम: नियति और पुरुषार्थ 
प्रवचन 7: साधना के चार चरण 
प्रवचन 8: बेशर्त स्वीकार 
प्रवचन 9: चरण-स्पर्श का विज्ञान 
प्रवचन 10: मनुष्य बीज है परमात्मा का 
प्रवचन 11: मांग और प्रार्थना 
प्रवचन 12: आंतरिक सौंदर्य 

 

 

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