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Dhyanyog: Pratham Aur Antim Mukti - ध्‍यानयोग: प्रथम और अंतिम मुक्‍ति

इक्कीसवीं सदी का जीवन जितनी तेज गति से भाग रहा है उतनी ही तेज गति से व्यक्ति के लिए तनाव बढ़ता जा रहा है। शांत बैठकर ध्यान में उतर जाना अब उतना सरल नहीं है जितना कि बुद्ध के समय में था। 

ध्यानयोग: प्रथम और अंतिम मुक्ति ओशो द्वारा सृजित अनेक ध्यान विधियों का विस्तृत व प्रायोगिक विवरण है, विशेषतः ओशो सक्रिय ध्यान विधियों व ओशो मेडिटेटिव थेरेपीज़ का, जो कि आधुनिक जीवन के तनावों से सीधे निपटती हैं व हमें ताजा व ऊर्जावान कर जाती हैं। ओशो बहुत सी प्राचीन विधियों की भी चर्चा करते हैं: विपस्सना व झाझेन, केंद्रीकरण की विधियां, प्रकाश व अंधकार पर ध्यान, हृदय के विकास की विधियां...। 

साथ ही ओशो ध्यान संबंधी प्रश्नों के उत्तर भी देते हैं व हमें बताते हैं कि ध्यान क्या है, कैसे ध्यान करना शुरू करें। और कैसे अपनी अंतर-यात्रा को निर्बाध रूप से जारी रख सकें। 

‘‘ध्यान की शुरुआत तो है, पर उसका कोई अंत नहीं है। वह अंनत तक अनवरत चलता चला जाता है। मन तो छोटी सी चीज है, ध्यान तुम्हें पूरे अस्तित्व का हिस्सा बना देता है। यह तुम्हें स्वतंत्रता देता है कि तुम पूर्ण के साथ एक हो जाओ।’’ 
ओशो

 

विषय सूची

ध्यान क्या है?

ध्यान की खिलावट

विधियां और ध्यान

साधकों के लिए प्रारंभिक सुझाव

सक्रिय ध्यान

“मिस्टिक रोज़” ध्यान

“नो-माइंड” ध्यान

“बॉर्न अगेन”

नटराज ध्यान

व्हिरलिंग ध्यान

दौड़ना, जॉगिंग और तैरना

हंसना ध्यान

धूम्रपान ध्यान

विपस्सना

प्रार्थना ध्यान

अनुभव करो—‘मैं हूं’ मैं कौन हूं?

अंतर्दर्शन ध्यान

ऊर्जा का अंतर्वृत्त

स्वर्णिम प्रकाश ध्यान

प्रकाश का हृदय

सूक्ष्म शरीर को देखना

आलो‍कमयी उपस्थि‍ति

अंधकार पर ध्यान

ऊर्जा को ऊर्ध्वगामी करना

नादब्रह्म ध्यान

ओम् ॐ

देववाणी

जेट-सेट के लिए एक ध्यान

मृत्यु में प्रवेश

गौरीशंकर ध्यान

मंडल ध्यान

पंख की भांति छूना

नासाग्र को देखना

झा-झेन

झेन की हंसी

संभोग में कंपना

ध्यान में बाधाएं

झूठी विधियां

मन की चालबाजियां

ओशो से प्रश्नोत्तर

 

 

Dhyanyog: Pratham Aur Antim Mukti

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