• Bhajgovindam Mudhmate

Bhajgovindam Mudhmate - भजगोविन्दम् मूढ़मते

इस पुस्तक में आदि शंकराचार्य की अद्वितीय कृति ‘भज गोविन्दम्‌’ पर बोलते हुए, ओशो कहते हैं, ‘‘इस मधुर गीत का पहला पद शंकर ने तब लिखा, जब वे एक गांव से गुजरते थे, और उन्होंने एक बूढ़े आदमी को व्याकरण के सूत्र रटते देखा। उन्हें बड़ी दया आई... धर्म व्याकरण के सूत्र में नहीं है, वह तो परमात्मा के भजन में है। और भजन, जो तुम करते हो, उसमें नहीं है। जब भजन भी खो जाता है, जब तुम ही बचते हो... बिना कहे तुम भजन हो जाओ, तुम गीत ही हो जाओ, इस तरफ शंकर का इशारा है।’’ 

*पुस्तक के मुख्य विषय-बिंदु:
*क्षण भंगुर के आकर्षण का कारण क्या है?
*प्रार्थना का मनोविज्ञान
*क्या है हमारा स्रोत? क्या है मंजिल? 

 

समीक्षा

पुस्तक के मुख्य विषय-बिंदु: क्षण भंगुर के आकर्षण का कारण क्या है? प्रार्थना का मनोविज्ञान क्या है हमारा स्रोत? क्या है मंजिल?

विषय सूची

प्रवचन 1 : सदा गोविन्द को भजो 
प्रवचन 2 : क्षणभंगुर का आकर्षण 
प्रवचन 3 : सत्संग से निस्संगता 
प्रवचन 4 : कदम कदम पर मंजिल 
प्रवचन 5 : आशा का बंधन 
प्रवचन 6 : तर्क का सम्यक प्रयोग 
प्रवचन 7 : परम-गीत की एक कड़ी 
प्रवचन 8 : संसार—एक पाठशाला 
प्रवचन 9 : दुख का दर्पण 
प्रवचन 10 : एक क्षण पर्याप्त है

 

 

Bhajgovindam Mudhmate

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