• Anahad Mein Bisram

Anahad Mein Bisram - अनहद में बिसराम

दरिया साहब के सूत्र से आरंभ होती हुई य‍ह प्रवचन माला विविध भंगिमाओं के साथ ओशो की वाणी से रससिक्त है। जात, पांत, धर्म, राजनीति में छिपे हुए पाखंड का पर्दाफाश करते हुए ओशो हमें एक अनंत की यात्रा का संकेत देते हैं। वे कहते हैं, ‘‘मेरा संन्यासी तो अनहद की तलाश में लगा है, सीमाओं का अतिक्रमण कर रहा है। घर छोड़ना नहीं है, घर में रहते ही जानना है कि घर मेरी सीमा नहीं है। परिवार छोड़ना नहीं है। परिवार में रहते ही जानना है कि परिवार मेरी सीमा नहीं है।’’

 

विषय सूची

प्रवचन 1 : संसार पाठशाला है

प्रवचन 2 : नास्तिकता : अनिवार्य प्रक्रिया

प्रवचन 3 : तप, ब्रह्मचर्य और सम्यक ज्ञान

प्रवचन 4 : वर्तमान क्षण की धन्यता

प्रवचन 5 : अंत:करण का अतिक्रमण

प्रवचन 6 : ॠषि पृथ्वी के नमक हैं

प्रवचन 7 : गुरु तीर्थ हैं

प्रवचन 8 : चिंतन नहीं—मौन अनुभूति

प्रवचन 9 : पहले ध्यान—फिर सेवा

प्रवचन 10 : सत्य की उदघोषणा

 

 

Anahad Mein Bisram

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